
देहरादून। आज जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म हाउस में एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों, संत समाज, सामाजिक संगठनों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सामाजिक समरसता संयोजक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े राजेंद्र पंत ने किया। सम्मेलन के संयोजक क्रीड़ा भारती के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जोगेंद्र पुंडीर रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर डॉ. रामेश्वर दास जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक धनंजय जी तथा विशिष्ट अतिथि लेखिका एवं साहित्यकार भारती पाण्डे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिंदा डांस एकेडमी के प्रतिभाशाली बच्चों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक गणेश वंदना एवं शिव तांडव नृत्य से हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक भाव से ओतप्रोत कर दिया।
अपने प्रारंभिक संबोधन में जोगेंद्र पुंडीर ने कहा कि इस प्रकार के हिन्दू सम्मेलनों के माध्यम से समाज में हिन्दुओं को जागृत एवं एकत्रित करने का कार्य पूरे प्रदेश और देश में निरंतर चल रहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म संपूर्ण विश्व और मानवजाति के कल्याण की भावना से प्रेरित है तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत पर आधारित होकर पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है, जिसमें छुआछूत और भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजनों से न केवल देश, बल्कि समूचे विश्व का कल्याण संभव है।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती भारती पाण्डे ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म में मातृशक्ति को सदैव सर्वोच्च एवं पूजनीय स्थान दिया गया है। उन्होंने समाज में महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सहभागिता को सनातन परंपरा की विशेष पहचान बताया।
मुख्य वक्ता धनंजय जी ने कहा कि सनातन धर्म का हजारों वर्षों का गौरवशाली इतिहास रहा है और आज भी प्रत्येक भारतवासी गर्व से स्वयं को हिन्दू कहता है। उन्होंने बताया कि संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी उनके सेवा कार्यों का सम्मान किया जाता है, क्योंकि सनातन परंपरा में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने पिता की आज्ञा के पालन हेतु राज्य त्यागकर वनवास स्वीकार किया और स्वर्णिम लंका विजय के पश्चात भी अपनी मातृभूमि अयोध्या लौटे। उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्षों तक भारत की शिक्षा पद्धति और पारिवारिक व्यवस्था पर प्रहार हुए, किंतु इसके बावजूद वह आज भी विश्व के लिए आदर्श है। इन्हीं विशेषताओं के कारण भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।
मुख्य अतिथि डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने अपने दिव्य संबोधन की शुरुआत वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड के पावन मंत्र:
“नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै ।
नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यो नमोऽस्तु चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः ॥”
तथा “हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्।
मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र: समानता।।” से की। उन्होंने हिन्दू धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन धर्म बताते हुए कहा कि इसका न आदि है न अंत। उन्होंने इतिहास में आए विकृतियों को दूर कर पुनः वैदिक मूल्यों की स्थापना पर बल दिया और कहा कि सनातन धर्म सदैव समानता और समरसता का संदेश देता है।
समाज में विशिष्ट कार्य करने वाले कर्मयोगी किए सम्मानित
सम्मेलन के अंत में समाज में विशिष्ट कार्य करने वाले कर्मयोगियों— जैसे हिन्दू नाई, बढ़ई, पुताई कार्यकर्ता, मनिहारी एवं सफाई कर्मियों सहित अन्य श्रमिक बंधुओं का सम्मान किया गया। इसके पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं जलपान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह हिन्दू सम्मेलन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण एवं संगठनात्मक एकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

