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पहाड़ का सच/एजेंसी।
नई दिल्ली। उत्तराखंड के लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगी रोक हटा गढ़वाल के लोगों को बड़ी राहत दे दी है। इस मार्ग से कोटद्वार से हरिद्वार की दूरी करीब 30 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं, इससे कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 18 गांवों को सड़क से जुड़ने से सीधे तौर पर लाभ होगा।
बता दें कि करीब 11.5 किलोमीटर लंबी इस मोटर मार्ग परियोजना का 4.7 किलोमीटर हिस्सा सेंट्रल फॉरेस्ट एरिया से होकर गुजरता है। इसी वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृतियों और आपत्तियों के कारण निर्माण कार्य लंबे समय से बाधित था। मामले में पहले पर्यावरण संबंधी चिंताओं को देखते हुए निर्माण पर रोक लगाई गई थी, जिससे क्षेत्रीय जनता को सालों तक असुविधा झेलनी पड़ी।
उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि व्यावसायिक वाहन इस सड़क से नहीं गुजरेंगे, वे उत्तर प्रदेश के रास्ते जाएंगे। पहले सरकार ने रोज 150 व्यावसायिक वाहनों की अनुमति का प्रस्ताव दिया था।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की ओर से लंबे समय से इस सड़क को ऑल वेदर रोड के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही थी ग्रामीणों का कहना था कि सड़क के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच प्रभावित होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
वहीं गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कहा है कि लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग जल्द बनेगा, राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग-चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर उच्चतम न्यायालय ने मेरे इंटरवेशन एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए 2023 से लगे स्टे ऑर्डर को हटा दिया है। यह फैसला कोटद्वार और आस पास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत है
विधानसभा अध्यक्ष और कोटद्वार से विधायक ऋतु खंडूड़ी ने कहा है कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कोटद्वार और आसपास के समस्त ग्रामीण अंचलों के लिए जीवनरेखा है। पिछले चार वर्षों से वह निरंतर इस विषय को लेकर प्रयासरत थी।
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि इस मार्ग को अनुमति मिलना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। अभी निजी वाहनों के लिए अनुमति मिली है, भविष्य में व्यावसायिक वाहनों के लिए भी प्रयास किया जाएगा।

