
– ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा

– विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा
पहाड़ का सच देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स (इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड) का फ्लैग ऑफ किया। यह लैब ऑन व्हील्स छात्रों को ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा।

लैब ऑन व्हील्स छात्रों को लर्निंग बाई डूइंग के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड लैब ऑन व्हील्स आगामी 5 वर्ष तक पूरे राज्य संस्थाओं में जाकर छात्रों को जागरूक करते हुए उनको हैण्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करेगा और उनको वैश्विक संभावनाओं से जोड़ेगा।
लैब ऑन व्हील्स राज्य में छात्रों के लिए हैण्स ऑन प्रशिक्षण की अनुपलब्धता को न्यून करेगा। लैब ऑन व्हील्स में उपलब्ध हैण्ड्स ऑन एवं प्रैक्टिकल्स उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों हेतु उपयोगी है।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर, प्रमोद नैनवाल,उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा के अधिकारी एवं इंफोसिस प्रतिनिधि उपस्थित थे।

क्या है ‘लैब ऑन व्हील्स’ (Lab on Wheels)
एक अभिनव मोबाइल शैक्षिक पहल है, जिसके अंतर्गत एक वैन या बस में आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर और तकनीकी उपकरण (3D प्रिंटर, रोबोटिक किट) लेकर सरकारी स्कूलों, विशेषकर ग्रामीण व वंचित क्षेत्रों में जाया जाता है। यह शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण को स्कूलों तक पहुँचाती है।
लैब ऑन व्हील्स की मुख्य विशेषताएं:
उद्देश्य: सरकारी स्कूलों के छात्रों में विज्ञान, गणित और तकनीकी विषयों के प्रति रुचि जगाना और व्यावहारिक ज्ञान देना।
सुविधाएं: वातानुकूलित बस में कंप्यूटर, इंटरनेट, वैज्ञानिक मॉडल, 3D प्रिंटर, और अन्य STEM उपकरण उपलब्ध होते हैं।
संचालन: इसे मुख्य रूप से दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) द्वारा, और कुछ अन्य स्थानों पर उत्तराखंड (UCOST) जैसी संस्थाओं द्वारा चलाया जा रहा है।
शिक्षण: DTU के छात्र या विशेषज्ञ इन बसों में जाकर कक्षा 6-10 के छात्रों को प्रैक्टिकल और प्रयोग कराते हैं।
लाभ: यह प्रयोगशाला के बिना काम कर रहे स्कूलों की कमी को पूरा करती है और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देती है।
यह पहल शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक और मनोरंजक बनाती है।
