
– यूपी और उत्तराखंड दोनों विधानसभाओं के रहे सदस्य

पहाड़ का सच देहरादून। टिहरी व घनसाली के पूर्व विधायक बलवीर सिंह नेगी का सोमवार को देहरादून में निधन हो गया। 76 वर्षीय बलवीर सिंह नेगी पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और कैलाश अस्पताल में उपचाराधीन थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
बलवीर सिंह नेगी उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में रहे, जिन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा के साथ-साथ उत्तराखंड विधानसभा का भी सदस्य बनने का अवसर मिला। उत्तराखंड राज्य गठन से पहले वर्ष 1989 में वे टिहरी विधानसभा क्षेत्र से जनता दल के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।
उस समय टिहरी जनपद में मात्र दो विधानसभा क्षेत्र ही हुआ करते थे।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में वे अपने गृह क्षेत्र घनसाली से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने पुनः घनसाली विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। बाद में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई।बलवीर सिंह नेगी 1970 के दशक से ही टिहरी की राजनीति में सक्रिय रहे। वे जिला पंचायत सदस्य भी रहे। सरल स्वभाव, कम बोलने और बिना प्रचार के काम करने के लिए वे जाने जाते थे।
पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने गांव में एक बगीचा विकसित किया था, जहां वे अक्सर समय बिताते थे। इस बगीचे में कीवी की खेती की गई थी, जिससे हर वर्ष कई कुंतल उत्पादन होता था।
उनके नाम एक विशेष राजनीतिक रिकॉर्ड भी रहा। वे तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों से विधायक चुने गए। उत्तर प्रदेश विधानसभा में जनता दल, उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और वर्ष 2007 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर उन्होंने जीत दर्ज की।
क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत प्रभाव इतना मजबूत था कि पार्टी टिकट औपचारिकता मात्र माना जाता था। उनका अंतिम संस्कार 27 जनवरी को प्रातः 11 बजे हरिद्वार में किया जाएगा। वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर दर्शनार्थ बदरीपुर, देहरादून स्थित आवास पर रखा गया है।
