
पहाड़ का सच देहरादून। मुख्यमंत्री द्वारा देहरादून में आयोजित चिन्तन शिविर में दिए गए स्थल निरीक्षण से सम्बन्धित निर्देशों के अनुपालन में एम.डी पिटकुल पीसी ध्यानी का कुमाऊं दौरे के बाद कार्य स्थलों के निरीक्षण का सिलसिला देहरादून में भी जारी है।

बतौर निदेशक मण्डल के अध्यक्ष के रूप में मुख्य सचिव आनन्द बर्धन और प्रमुख सचिव (ऊर्जा) डॉ आर मीनाक्षी सुन्दरम द्वारा विभिन्न कार्यस्थलों के निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लेने के सन्दर्भ में निर्गत निर्देशों के अनुपालन में गत सप्ताह प्रबन्ध निदेशक कुमाऊँ दौरे पर थे। लोहाघाट, खटीमा, धौलाखेड़ा और सितारगंज में निर्माणाधीन उपकेन्द्रों का निरीक्षण कर प्रगति समीक्षा की गई थी। उनके द्वारा अनुकूल मौसम में कार्य की गति को बढ़ाने और मिलकर एक टीम की भांति कार्य करने का आह्वाहन कर कार्मिकों का मनोबल बढ़ाया।

ध्यानी द्वारा माजरा परिसर में निर्माणाधीन प्रांतीय भार निस्तारण केन्द्र (उत्तराखंड एस.एल.डी.सी.) का निरीक्षण किया। गहन निरीक्षण के उपरान्त कार्यदायी संस्था ब्रेथवेट और कार्यरत ठेकेदारों को दिन रात शिफ्टों में कार्य करते हुए भवन को हर दशा में फ़रवरी 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। निर्माणाधीन भवन के सभी तलों में मानव शक्ति के अभाव में कार्य प्रभावित होता पाया और घोर अप्रसन्नता प्रकट की। सीलिंग, दरवाजे, खिड़कियों, एल.टी. रूम, ट्रांसफार्मर की फाउंडेशन, पम्प हाउस के निर्माण सहित अवशेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
उसके बाद ध्यानी सीधे निर्माणाधीन 123 के.वी. जी.आई.एस. उपकेन्द्र, आराघर पहुँचे। 33 के.वी. जी.आई.एस. का निरीक्षण कर इरेक्शन और फ्लोरिंग कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। कन्ट्रोल रूम में फ्रेम सहित दरवाजे, खिड़कियों, ग्लेज्ड फ्लोट ग्लास, फ्लोरिंग एवं टाइलिंग का कार्य अधूरा पाया गया। वर्क फ्रंट उपलब्ध होने के बावजूद भी मानव शक्ति के अभाव में हो रहे विलम्ब पर नाराजगी प्रकट की। मौके पर अनुपस्थित कार्यदायी संस्था फ्लोमोर के महाप्रबंधक एवं उपमहाप्रबंधक को दूरभाष पर अवशेष जनपदीय कार्यों को हर दशा में 28 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
132 के.वी. जी.आई.एस. हॉल में अविलम्ब सफाई, फ्लोरिंग एवं ईपॉक्सी कोटिंग का कार्य पूर्ण कर 132 के.वी. जी.आई.एस. को विलम्बत: 28 जनवरी तक हॉल में शिफ्ट कर इनस्टॉल करने के आदेश दिए गए। जी.आई.एस. उपकरणों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भण्डारण, शिफ्टिंग एवं इंस्टालेशन में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए है, क्यूंकि किसी भी कारणवश यदि कोई भी पार्ट क्षतिग्रस्त होता है तो उसको बदलने में खासा वक्त लगेगा जिससे पिटकुल का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
निरीक्षण के दौरान पी. सी. ध्यानी के साथ निदेशक (परिचालन) जी. एस. बुदियाल, मुख्य अभियंता पंकज चौहान और अरुण सभरवाल उपस्थित थे।
