
– बड़ी जात को बुनियादी सुविधाएं और रेस्क्यू बनेगी अग्नि परीक्षा

चमोली । मौजूदा साल में नंदा की बड़ी जात तथा अगले साल नंदा राजजात आयोजित करने को लेकर अब सरकार के सामने बुनियादी सुविधाओं को जुटाने की दोहरी चुनौती आ खड़ी हो गई है।
बताते चलें कि कांसुवा-नौटी से निकलने वाली राजजात को मलमास तथा मौसमीय चुनौतियों के कारण इस साल के लिए स्थगित कर दिया गया है। और अगले साल नंदा राजजात आयोजित करने की भी घोषणा कर दी गई है। इसके लिए मनौती भी कर ली गई है।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से इस बार नंदा की बड़ी जात आयोजित करने का ऐलान कर दिया गया है। पहली बार कुरूड़ से शुरू होने वाली नंदा की बड़ी जात इसी साल प्रारंभ करने पर अडिग है । आयोजन समिति के फैसले से अब सरकार की बुनियादी सुविधाओं को लेकर दुविधा बढ़ गई है। चूंकि अभी तक कुरूड़ से संचालित होने वाली बड़ी जात के लिए बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकारी स्तर से कोई रोड़ मैप तैयार नहीं किया गया था। सरकारी स्तर से अभी तक कांसुवा-नौटी से शुरू होने वाली 280 किमी की लंबी पैदल यात्रा के पड़ावों और रास्तों को लेकर ही बुनियादी सुविधाओं के रोड़ मैप पर काम किया जा रहा था। चूंकि कुरूड़ से शुरू होने वाली बड़ी जात को नंदा राजजात के मैप में तरजीह नहीं दी गई थी।
इस पर ही यह विवाद खड़ा हुआ। अब तक का फोकस तो नंदा राजजात के रूट चार्ट पर ही चल रहा था। कुरूड़ के रूट चार्ट की घोषणा के बाद इसी साल व्यवस्थाओं को जुटाना आसान भी नहीं है। ऐसा इसलिए कि कुरूड़ से चलने वाली बड़ी जात का रूट चार्ट विकट भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यह अलग बात है कि थराली से आगे होमकुंड तक का रूट चार्ट तो एक ही है। हां, दशोली की नंदा की डोली का रूट चार्ट इस तरह है कि रामणी से विकट भौगोलिक परिस्थितियों से घिरे इलाकों से होकर डोली वाण में मिलेगी। बधाण की डोली की वापसी भी कुछ नये इलाकों से होगी। इसलिए बुनियादी सुविधाओं को जुटाना आसान भी नहीं होगा।
सरकार अभी तक होमकुंड से जामुनडाली, तातडा, द्योसिंगधाम होते हुए वापस कुरूड आएगी। इस तरह बड़ी जात के लिए सरकारी अमले के सामने बुनियादी सुविधाएं जुटाना आसान नहीं होगा। हालांकि अभी आठ माह का समय तो है, किंतु उच्च हिमालयी और विकट परिस्थिति वाले इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली किसी चुनौती से कम नहीं रहेगी।
इस तरह के सवाल अब सरकारी अमले के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं हैं। इस बार तो बड़ी जात यात्रा कुछ विलंब से निकल रही है तो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसमीय चुनौतियां अलग से बनी रहेंगी। इसके लिए पर्याप्त फोर्स और रेस्क्यू टीम को भी बढ़ाना होगा। वैसे भी हर साल निकलने वाली लोकजात यात्रा बेदनी कुंड और बालपाटा तक जाती है। बेदनी कुंड में लोकजात यात्रा का समापन होते ही ठंड भी जोरदार दस्तक देने लगती है।
कहा जाता है कि बेदनी कुंड में लोकजात यात्रा निपटने के पश्चात सर्दी का भी आगाज हो जाता है। इस तरह के सवाल अब सरकारी अमले के लिए परेशानी का सबब बनने जा रहे हैं। फिर भी नंदा सिद्धपीठ कुरूड के आयोजक बड़ी जात पर अडिग है तो बुनियादी सुविधाओं की बहाली और रेस्क्यू आपरेशन की दोहरी चुनौती बनी रहेगी। अब देखना यह है कि इस अग्नि परीक्षा से सरकारी अमला किस तरह पार पाता है। इस पर ही नंदा की बड़ी जात का सुरक्षित भविष्य निर्भर करेगा।
