
वीआईपी, बुलडोजर से साक्ष्य मिटाने, नार्को टेस्ट व एसआईटी की जांच समेत कई पहलुओं की होगी जांच पड़ताल

कई सफेदपोश भी होंगे बेनकाब, प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा असर
देहरादून। राज्य में चारों तरफ हुए जन आंदोलन व अंकिता के माता पिता से मिलने के बाद धामी सरकार ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच का फैसला लेकर जनभावना को समझा। अब सीबीआई जांच में वीआईपी समेत कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है। सीबीआई जांच के दौरान कुछ नये व सफेदपोश चेहरों से नकाब उठने की भी उम्मीद जताई जा रही है। इससे प्रदेश की राजनीति पर व्यापक असर पड़ सकता है।

हत्याकांड के सवा तीन साल बाद उत्तराखण्ड की राजनीति को हिलाने वाली ऑडियो क्लिप के बाद प्रदेश की राजनीति में घमासान छिड़ गया है जिसने जन आंदोलन का रूप ले लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता के अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।
18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के निकट वनन्तरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी थी। 24 सितंबर को अंकिता भंडारी की लाश चीला नहर में मिली थी। इस हत्याकांड की कोटद्वार में चली सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को अभियुक्त पुलकित आर्य, सौरभ व अंकित गुप्ता को उम्र कैद हुई।
लेकिन हत्या की मूल वजह वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने के मसले पर एसआईटी ने कोई जांच नहीं की। अंकिता ने अपने मित्र पुष्पदीप को भेजे व्हाट्सएप्प सन्देश में कहा था कि उस पर किसी वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने का दबाव बना रहे हैं।

इस बीच, दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के बीच हुई मोबाइल वार्ता में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम और अजेय कुमार का नाम बतौर वीआईपी आया।
वनन्तरा रिसॉर्ट भाजपा व संघ से जुड़े नेता विनोद आर्य का है। इस रिसॉर्ट में बड़े लोगों का आना जाना लगा रहता था। भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक, सामाजिक जन सगठनों ने पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ दिया और चारों तरफ से सीबीआई जांच की मांग उठने लगी।आन्दोलन के बीच में ही उर्मिला सनावर और राठौर पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए। दुष्यंत गौतम ने भी राठौर और सुरेश पर मुकदमे दर्ज करवाए। आंदोलन को देखते हुए भाजपा के अंदर से भी सीबीआई जांच की मांग उठने लगी। इस मामले में दिल्ली में भी वीआईपी को लेकर प्रदर्शन हुए।

इधऱ, उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर भी अपने बयान दर्ज करवा चुके हैं। आंदोलन के दौरान रिसॉर्ट में बुलडोजर चला कर साक्ष्य मिटाने का मुद्दा भी बहुत गरमाया। इस मुद्दे पर भाजपा विधायक रेणु बिष्ट और निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभियुक्तों और पुष्पदीप का नार्को टेस्ट नहीं होने पर भी उंगलियां उठी। सवा तीन साल के लंबे अवधि के बाद देश की सीबीआई अंकिता हत्याकांड के वीआईपी को पकड़ पाएगी ? बुलडोजर चला कर साक्ष्य मिटाने वाले सीबीआई की गिरफ्त में होंगे ? अब सभी की निगाहें सीबीआई पर टिक गई हैं।
सीएम धामी ने कहा :
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा। स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की, जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।
