
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक – 10 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*
🌥️ *अमांत – 26 गते पौष मास प्रविष्टि*
🌥️ *राष्ट्रीय तिथि – 20 पौष मास*
🌤️ *मास – माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – सप्तमी सुबह 08:23 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र – हस्त शाम 03:40 तक तत्पश्चात चित्रा*
🌤️ *योग – अतिगण्ड शाम 04:59 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 09:51 से सुबह 11:08 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:34*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:14*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *सर्दियों की पुष्टिवर्धक खुराक* 🌷
👉🏻 *सर्दियों की पुष्टिवर्धक खुराक बनाओ | काले तिल ले लो, थोडा गुड़ डाल के चिक्की बनाओ | १० ग्राम चिक्की चबा-चबा के खाओ, ज्यादा नहीं | इससे मसूड़े मजबूत होंगे, दाँत मजबूत होंगे, पेशाब-संबंधी तकलीफें नहीं होंगी और शरीर मजबूत व पुष्ट होगा |*
💥 *(यह प्रयोग सर्दियों में सुबह खाली पेट करना लाभदायी होता है |)*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *ध्यान की महिमा* 🌷
👉🏻 *आज्ञाचक्र में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से बुद्धि विकसित होती है और नाभि में ओंकार या गुरु का ध्यान करने से आरोग्य एवं रोग प्रतिकारक शक्ति विकसित होती है l*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *सुख-शांति व बरकत के उपाय* 🌷
🔥 *तुलसी को रोज जल चढायें तथा गाय के घी का दीपक जलायें |*
🍃 *सुबह बिल्वपत्र पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर संकल्प करके शिवलिंग पर अर्पित करें तथा ह्र्द्यपुर्वक प्रार्थना करें |*
