
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

*🌞~ वैदिक पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 08 जनवरी 2026*
*⛅दिन – गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – दक्षिणायण*
*⛅ऋतु – शिशिर*
*🌥️ अमांत – 24 गते पौष मास प्रविष्टि*
*🌥️ राष्ट्रीय तिथि – 18 पौष मास*
*⛅मास – माघ*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – षष्ठी सुबह 07:05 जनवरी 09 तक तत्पश्चात् सप्तमी*
*⛅नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी दोपहर 12:24 तक तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी*
*⛅योग – सौभाग्य शाम 05:26 तक तत्पश्चात् शोभन*
*⛅राहुकाल – दोपहर 01:4प से दोपहर 02:56 तक ( हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 07: 14हरिद्वार*
*⛅सूर्यास्त – 05:34 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:24 से प्रातः 06:17 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 12:55 तक ( हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:07 जनवरी 09 से रात्रि 01:00 जनवरी 09 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*🌥️विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🔹नौकरी मिलने में समस्या🔹*
*🔸जिनको नौकरी नहीं मिलती या मिलती है पर छूट जाती है वे लोग आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें और पूजा की जगह पर शांत बैठो, अधीर मत बनो, डोरे धागे या तावीज बांधने के चक्कर में न पड़ो । शांत बैठ कर आज्ञा चक्र पर तिलक कर के बंद आँखों से उधर देखते हुए ” ॐ श्रीं नमः” “ॐ ह्रीं नमः” जपें और बैठ कर १५ मिनट पूज्य बापूजी की तस्वीर को एकटक देखें… ध्यान करें । फिर आँखों की पलकें बंद करके आज्ञा चक्र पर ध्यान केन्द्रित करो और शुभ संकल्प करो । और ओमकार का ध्यान करते हुए शांत बैठें मनोरथ सिद्ध होंगे बाहर का कोई सहारा लेने की कोई जरुरत नहीं ।*
*🔹श्रीमद् भगवदगीता माहात्म्य🔹*
*🔸जो मनुष्य भक्तियुक्त होकर नित्य एक अध्याय का भी पाठ करता है, वह रुद्रलोक को प्राप्त होता है और वहाँ शिवजी का गण बनकर चिरकाल तक निवास करता है ।*
*🔸हे पृथ्वी ! जो मनुष्य नित्य एक अध्याय एक श्लोक अथवा श्लोक के एक चरण का पाठ करता है वह मन्वंतर तक मनुष्यता को प्राप्त करता है ।*
*🔸जो मनुष्य गीता के दस, सात, पाँच, चार, तीन, दो, एक या आधे श्लोक का पाठ करता है वह अवश्य दस हजार वर्ष तक चन्द्रलोक को प्राप्त होता है । गीता के पाठ में लगे हुए मनुष्य की अगर मृत्यु होती है तो वह (पशु आदि की अधम योनियों में न जाकर) पुनः मनुष्य जन्म पाता है ।
