
– भाजपा विधायक रेनू बिष्ट से भी पूछताछ होनी चाहिए, रात को रिसॉर्ट तुड़वाने में क्या भूमिका थी

– सरकार को ढाई बजे रिसॉर्ट तुड़वाने के आदेश क्यों देने पड़े , आग क्यों लगाई गई? जबाव दे सरकार
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि धामी सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच कराने से भाग रही है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य मिटाने के लिए रिजॉर्ट में सरकार की सहमति से ही बुल्डोजर चलाया गया।
बुधवार को कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत में गोदियाल ने कहा कि मंगलवार को जब सीएम धामी प्रेस के सामने आए और जब पत्रकारों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में नए तथ्यों के खुलासे पर सवाल पूछा तो सीएम काफ़ी असहज नज़र आए और मीडिया से ही उल्टा सवाल करने लगे। ये सीएम की इस मुद्दे पर मंशा दर्शा रही है।
उन्होंने कहा कि जिस दिन अंकिता भंडारी की हत्या हुई उससे दो दिन पहले रिसोर्ट मालिक के द्वारा पटवारी चौकी में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया और अंकिता के पिता पर चौकी में भी दबाव बनाने की कोशिश की गई कि वे इस बात को मान जायें कि उनकी बेटी भाग गई है, पर उन्होंने ऐसा नहीं माना फिर पटवारी आया। उन पर किसी पेपर पर हस्ताक्षर कराने पर ये कोशिश परवान नहीं चढ़ पायी पर उसका शव बरामद हुआ और मीडिया ने अंकिता और उसके मित्र ने उसके और अंकिता के बीच के संदेशों के आदान प्रदान को सार्वजनिक किया तब लोकल मीडिया ने ये बात उठाई।
तब ये बात उठी की अंकिता ने अपनी जान के खतरे का अंदेशा पहले ही जता दिया था, तब सरकार पर दबाव बना जब काफ़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। सरकार ने उन लोगों पर भी बल का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि ये बात वो इसलिए बोल रहे हैं चूंकि वो सरकार पर साफ़ आरोप लगा रहे हैं कि सरकार को पहले से ही पता था कि अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई है और हत्या की वजह भी उन्हें पता थी। पहले दिन से ही सरकार वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। उसके बाद सरकार ने सबूतों को नष्ट करने का कार्य शुरू किया ।
उन्होंने कहा की मैं पूछना चाहता हूँ सरकार से कि क्या एसआई टी ने यमकेध्वर विधायक रेणु बिष्ट से पूछताछ की? क्या उनसे ये पूछा की किसके बोलने पर उन्होंने रिसोर्ट को तुड़वा दिया? और तो और अंकिता के कमरे की हर चीज़ को जला दिया और कोई सबूत बच ना जाये तो राख तक तो पानी में डलवा दिया। उसके बाद सबने इसका श्रेय लेना शुरू कर दिया पर सच तो ये है की ये सब प्रायोजित घटनाक्रम था जो सिर्फ़ वीआईपी को बचाने के लिए रचा गया था। पौड़ी पुलिस से लेकर तत्कालीन डी जी पी तक ने ट्वीट करके ये बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार रिसोर्ट को तुड़वा दिया गया है। ये एक षड्यंत्र था जो सरकार ने रचा था।
गोदियाल ने कहा कि आज जो नए तथ्य सामने आए हैं उन तथ्यों के मद्देनजर सरकार सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है। सरकार शुरू से ही जांच को अलग दिशा में ले जाने का कार्य कर रही है।उनके पूर्व विधायक की धर्म पत्नी अपने और अपने पति के बीच की वार्तालाप को सबके समक्ष लेकर जिसने किसी गट्टू का नाम वीआईपी के तौर पर सामने आया और गट्टू और कोई नहीं भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ही है जिसके बाद महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे को जाति धर्म में बाटने का कार्य किया पर वो दांव उन्हें उल्टा पड़ा और उनकी भी कलाई खोलने का कार्य उस महिला ने किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बोल रहे थे की जांच होगी मैं पूछना चाहता हूँ की कब होगी। उन्होंने प्रदेश के लोगों का आभार जताया जो इस लड़ाई में एकजुट होकर खड़े रहे उस बच्ची के साथ प्रदेश की देव तुल्य जनता चाहे वो किसी भी धर्म का हो जाति का हो , क्षेत्र का हो इन बातों से ऊपर उठकर अंकिता की लड़ाई में साथ दे रहे हैं । आज सबकी यही माँग है की उच्चतम न्यायालय के सिटिंग या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में ही ये जाँच हो, जानता आज न्याय की माँग कर रही है।
गोदियाल ने अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से उन अनुत्तरित सवालों का जवाब मांगा जो उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था से 10 दिन पूर्व पूछे थे कि अंकिता भंडारी का पार्थिव शरीर नहर से निकालने की अगली रात को वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुल्डोजर किसके आदेश पर चलवाया गया? राज्य सरकार द्वारा गठित एस.आई.टी. ने यदि बुल्डोजर चलाने वालों के बयान दर्ज किये हों, तो उत्तराखंड के नागरिकों को यह भी बताने का कष्ट करें कि एस.आई.टी. की रिपोर्ट में उपरोक्त पैरा-1 के सम्बन्ध में क्या तथ्य सामने आये?
क्या जांच एजेंसी या एस.आई.टी. इस तथ्य से विज्ञ है कि रात्रि 2ः30 बजे अंकिता भंडारी के वनन्तरा रिसॉर्ट स्थित निवास कक्ष को बुल्डोजर द्वारा ध्वस्त करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उनके द्वारा रिसॉर्ट का ध्वस्तीकरण कराया गया है, जिसका उनके द्वारा श्रेय लेने की कोशिश की गई?
क्या एस.आई.टी. द्वारा अपनी जांच में मुख्यमंत्री की इस बात का उल्लेख किया गया है? क्या एस.आई.टी. ने अंकिता भंडारी एवं उसके मित्र के बीच हुई व्हाट्सअप बातचीत संदेशों की गहनता से जांच की गई जिसमें अंकिता के द्वारा स्पष्ट रूप से यह बताया गया था कि किसी वी.आई.पी. को विशेष सेवायें देने का उस पर भारी दबाव है? आपके द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में बताया गया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सी.बी.आई. जांच इसलिए संभव नहीं है कि न्यायालय द्वारा इसे अमान्य कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में आपसे स्पष्टीकरण की अपेक्षा है कि सभी पक्षकारों द्वारा सी.बी.आई. जांच की मांग के उपरान्त सरकार द्वारा इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?
भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की अंकिता भंडारी के शयन कक्ष को ध्वस्त करने में जो भूमिका थी, क्या जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा इसका संज्ञान लिया गया है? यदि जांच ऐजेंसी ने इसका संज्ञान लिया तो जांच ऐजेंसी की खोज के परिणाम क्या थे? गणेश गोदियाल ने यह भी कहा कि अंकिता भंडारी के पिता ने अनेकों बार तथा अभी कुछ दिन पहले एक चैनल को दिये गये साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा है कि अंकिता भंडारी की गुमशुदगी के बाद जब वे पहली बार पटवारी चौकी में पहुंचे तो पटवारी द्वारा उन्हें धमकाकर चुप कराने की कोशिश की गई और उनके इन आरोपों पर (जिसमें उन्होंने यह कहा कि पटवारी द्वारा मुझ पर दबाव बनाया गया कि मैं आपरोपियों के पक्ष में बातें कहूं और अंकिता की हत्या को आत्महत्या मान लूं यही नहीं आरोपी पक्ष द्वारा भी उन्हें डाराया-धमकाया गया) अभी तक जांच ऐजेंसी/एस.आई.टी. द्वारा कोई समाधान कारक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
पुलिस विभाग का बार-बार यह कहना कि किसी के पास हत्याकांड के प्रमाण हो तो पुलिस को उपलब्ध कराये, संदेह को और गहराता है। यह जानते हुए भी कि सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा हत्याकांड के सबूत नष्ट किये गये और इसकी सच्चाई सत्तापक्ष के सबूत नष्ट करने वाले लोग ही जानते हैं इसके बावजूद उन्हें जांच के घेरे में न लाने वाली स्थिति पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कांग्रेस पार्टी के सवाल आज भी अनुत्तरित हैं और भाजपा सरकार के मुखिया, भाजपा के पदाधिकारी पत्रकार वार्ता आयोजित कर केवल जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं ।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक मनोज रावत, निवर्तमान मीडिया चेयरमैंन राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष डॉ जसविन्दर सिंह गोगी उपस्थित थे।
