
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🌞~ वैदिक पंचांग ~🌞
⛅दिनांक – 07 जनवरी 2026
⛅दिन – बुधवार
⛅विक्रम संवत् – 2082
⛅अयन – दक्षिणायण
⛅ऋतु – शिशिर
🌥️ अमांत – 23 गते पौष मास प्रविष्टि
🌥️ राष्ट्रीय तिथि – 17 पौष मास
⛅मास – माघ
⛅पक्ष – कृष्ण
⛅तिथि – पंचमी प्रातः 06:33 जनवरी 08 तक तत्पश्चात् षष्ठी
⛅नक्षत्र – मघा सुबह 11:56 तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी
⛅योग – आयुष्मान् शाम 06:34 तक तत्पश्चात् सौभाग्य
⛅राहुकाल – दोपहर 12:23 से दोपहर 01:39 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅सूर्योदय – 07:14
⛅सूर्यास्त – 05:32 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में
⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:24 से प्रातः 06:17 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं
⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:07 जनवरी 08 से रात्रि 01:00 जनवरी 08 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
🌥️विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
🔹हवन-यज्ञ क्यों ?🔹
🔹वैश्विक समस्याओं में जाति, मत, पंथ, देश के दायरों से परे होकर देखें तो जो विकराल समस्याएँ हैं उनमें से एक है वातावरण और वैचारिक प्रदूषण की समस्या । विभिन्न देशों द्वारा करोड़ों-अरबों डॉलर खर्च करके उपाय खोजे व किये जा रहे हैं परंतु यह समस्या वैसी ही बनी हुई है । इसके निवारण हेतु विश्व अब भारत की प्राचीन धरोहर यज्ञ-हवन की ओर एक आशाभरी नजर से देख रहा है। यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा चलायी गयी परम्परा है और समय-समय पर महापुरुषों द्वारा इसे सुविकसित व लोकसुगम्य बनाया गया है ।
🔹कारखानों व गाड़ियों आदि के धुएँ से वातावरण दूषित होता है, जिससे फेफड़ों व श्वास के विभिन्न रोग होते हैं । यज्ञ-हवन दूषित वायुमंडल को तो शुद्ध करता ही है, साथ ही इससे मानसिक कुविचारों पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है ।
🔹प्रज्वलित खाँड (अपरिष्कृत शक्कर) में वायु को शुद्ध करने की अत्यधिक शक्ति होती है । घी की आहुति से वातावरण शुद्धि तथा विभिन्न रोगों के कीटाणुओं का नाश होता है । अतः जिन स्थानों पर हवन होता है वहाँ फसल अच्छी होती है ।
🔹श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ पूज्य बापूजी यज्ञ की उपयोगिता समझाते हुए कहते हैं : “तुम्हारे जीवन में यज्ञ के लिए भी स्थान होना चाहिए । श्रीकृष्ण बताते हैं : यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि… ‘सब प्रकार के यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।’ (गीता : १०.२५)
परंतु आहुति देकर जो यज्ञ होते हैं, वे भी अच्छे हैं, उनका भी अपना महत्त्व है ।
