
– अंकिता केस में मुख्यमंत्री के वक्तव्य के बाद सीबीआई जांच की उम्मीद जगी

-‘कथित ऑडियो क्लिप के आधार पर प्रदेश में अनावश्यक माहौल बनाया जा रहा’
– सशक्त पैरवी से तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है
देहरादून। पिछले लगभग दो हफ्ते से अंकिता हत्याकांड के मुद्दे पर आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अपने मन की कही। उन्होंने साफ किया कि यद्यपि पूरे प्रदेश की जनता की भावनाएं बेटी अंकिता के साथ जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस दुखद घटना से सबसे अधिक प्रभावित उसके माता-पिता हैं।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे और उनकी भावनाओं, पीड़ा एवं अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और इस दिशा में सरकार ने पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य अपराध की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए महिला अधिकारी श्रीमती रेणुका देवी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, जिसने मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच की। सरकार की सशक्त और प्रभावी न्यायालयीय पैरवी के परिणामस्वरूप तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच पर न केवल निचली अदालत, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय ने भी संतोष व्यक्त किया है, जो जांच की निष्पक्षता और मजबूती को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्तमान में किसी कथित ऑडियो क्लिप के आधार पर प्रदेश में अनावश्यक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी गंभीरता से अपने निष्कर्ष तक पहुंच चुकी है और दोषियों को कड़ी सजा मिल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की ऑडियो क्लिप में भाजपा के दो बड़े नेताओं दुष्यंत गौतम और संगठन महामंत्री अजेय कुमार का नाम सामने आया था।
इस मुद्दे पर विपक्षी दल व कई संगठन सड़कों पर उतरे हुए हैं। जबकि सुरेश राठौर और उर्मिला भूमिगत हो रखे हैं। दोनों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हो गए। इधऱ, राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने 5 जनवरी को राठौर,उर्मिला समेत विपक्षी दलों पर देहरादून में मुकदमा दर्ज करवा दिया। साथ ही कई मीडिया मंचो को नोटिस भेजा है। वीआईपी व सीबीआई जांच के अलावा बुलडोजर से रिसॉर्ट को तोड़े जाने को भी आंदोलनकारी जनता ने मुद्दा बनाया हुआ है।
11 जनवरी को उत्तराखण्ड बन्द का कार्यक्रम है। प्रवासी उत्तराखंडी दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। मशाल जुलूस व धरना प्रदर्शन के बीच सीएम धामी ने मंगलवार को सरकाए का पक्ष रखा। सीएम अब अंकिता के माता-पिता से बात कर फैसला लेंगे। सीएम के वक्तव्य के बाद सीबीआई जांच की सम्भावना को भी बल मिलता दिख रहा है।
