
– अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग पर कांग्रेस सहित कई दलों का सीएम आवास कूच, झलका जनाक्रोश

– 11 जनवरी को उत्तराखण्ड बन्द का ऐलान, दून और जंतर मंतर में तीव्र हुआ आंदोलन
देहरादून/नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और वीआईपी की गिरफ्तारी को लेकर उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक तीव्र जनाक्रोश देखने को मिला। देहरादून में पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त धक्का मुक्की व नोक झोंक हुई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के रविवार को सीएम आवास कूच में लगभग सभी राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठन शामिल हुए।

रविवार की सुबह 11 बजे परेड ग्राउंड में आंदोलनकारी झंडे व बैनर के साथ पहुंचने लगे। कांग्रेस, उक्रांद, वामपंथी दलों के अलावा महिला मंच, रीजनल पार्टी व कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने सीएम आवास की ओर कूच किया। सैकड़ों प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां व पोस्टर लेकर वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। और अंकिता हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं..बोल पहाड़ी हल्ला बोल..समेत कई अन्य नारे लगा रहे थे।

हाथी बड़कला में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। धक्का मुक्की के बीच कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड पर चढ़ गए। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरना देकर बैठ गए। इस दौरान जबरदस्त नारेबाजी व जनगीतों ने आंदोलन में गर्मी भर दी। कई युवा व उत्साही प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई। धक्का मुक्की में भगवा वस्त्रधारी प्रदर्शनकारी के घायल होने की खबर से अफरा तफरी भी मची। पुलिसकर्मी घायल को अस्पताल ले गए।
प्रदर्शन की समाप्ति से पूर्व सीएम को सम्बोधित ज्ञापन दिया गया। साथ ही 11 जनवरी को प्रदेश बन्द का ऐलान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस एक हफ्ते में सरकार आरोपित वीआईपी को जांच के दायरे में लाए। वक्ताओं ने प्रदेश बन्द के लिए व्यापारियों से वार्ता करने की बात भी कही ।इसके अलावा आने वाले दिनों में मशाल जुलूस व प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहेगा।

सीएम आवास घेराव के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भाजपा के शासन में राज्य में महिलाओं के शोषण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसका मुकाबला सभी राज्यवासियों को एकजुट होकर करना होगा। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड राज्य सभी हिमालयी राज्यों में महिला अपराध के मामलों में प्रथम स्थान पर खड़ा है तथा इस राज्य में जितनी भी महिला शोषण की घटनायें हुई हैं उनमें सत्ताधरी दल के नेताओं की संलिप्तता राज्य की अस्मिता को कलंकित करने वाली तथा राज्यवासियों को शर्मिंन्दा करने वाली है। .उन्होंने कहा कि सत्ताधारी भाजपा के नेताओं की नजरों में मातृशक्ति की अस्मिता की कीमत केवल 20-25 हजार रूपये है इससे अधिक शर्मनाक बात क्या हो सकती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हत्याकांड के दिन से लगातार इस मामले में सरकार को जगाने का काम कर रही है लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय नहीं हो पाया है तथा आज जब वीआईपी के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यन्त गौतम की भूमिका सामने आई है तो भाजपा की सरकार को सांप सूंघ गया है।

गोदियाल ने कहा कि सरकार सीबीआई जांच से बचने और सच्चाई सामने आने के डर से पुलिस के माध्यम से उल्टे सीधे तर्क दे रही है। सरकार में बैठे लोग अपनी सरकार से सीबीआई जांच कराने की बजाय जनता से सबूत लाने को कह रहे हैं इससे ज्यादा हास्यास्पद क्या हो सकता है। गोदियाल ने कहा कि आज अंकिता भंडारी को न्याय देने के लिए कांग्रेस पूरे प्रदेश में आन्दोलित है तथा कांग्रेस का यह आन्दोलन तब तक नहीं रुकेगा जब राज्य की बेटी अंकिता भंडारी सहित अन्य सभी बेटियों को न्याय नहीं मिलेगा और अपराधी सलाखों के पीछे नहीं होंगे।
मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जिनमें पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, पूर्व मीडिया चेयरमैन राजीव महर्षि, महामंत्री राजेन्द्र भंडारी, राजेन्द्र शाह, महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला, डॉ0 प्रतिमा सिंह, शिवानी थपलियाल मिश्रा, महानगर अध्यक्ष डॉ जसविन्दर सिंह गोगी, पूर्व सैनिक अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, आशा मनोरमा शर्मा, पुष्पा पंवार, निधि नेगी, अनुसूचित जाति अध्यक्ष मदन लाल, अमरजीत सिंह, यशपाल चौहान, वीरेंद्र पंवार, अनुराधा तिवारी आदि सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
सल्ट में करण माहरा ने विरोध प्रदर्शन किया राज्य के कई हिस्सों में रविवार को धरना-प्रदर्शन हुए। इसी दौरान आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 11 जनवरी को उत्तराखण्ड बन्द का ऐलान किया गया।
