
– चमोली के डीएम ने आबकारी अधिकारी के निलंबन का चिट्ठा शासन को भेजा
.- आबकारी अधिकारी और आयुक्त कार्य शैली पर उठे सवाल
– दो दुकानों से अधिभार भी लिया कम, जिलाधिकारी हुए सख्त
पहाड़ का सच देहरादून।
चमोली जिले में डीएम और आबकारी अधिकारी की तनातनी के पीछे शराब की दुकानों के आवंटन का मामला सामने आया है।
दो दुकानों के आवंटन में डीएम को बायपास कर सीधे आबकारी आयुक्त एच सी सेमवाल से आवंटन के आदेश करा लिए गए।
इस मसले से नाखुश डीएम संदीप तिवारी ने आबकारी प्रमुख सचिव एल फैनई को पत्र लिख आबकारी अधिकारी दुर्गेश्वर कुमार त्रिपाठी के निलंबन की मांग की है। दून के शराब एपिसोड में भी आबकारी आयुक्त सेमवाल ने हस्तक्षेप कर डीएम बंसल के आदेश को रद्द करते हुए सील बन्द शराब की दुकान को खुलवा दिया था।
इधऱ, चमोली जिले में भी शराब के मसले पर आबकारी आयुक्त सेमवाल और आबकारी अधिकारी त्रिपाठी की जुगलबंदी सामने आई है। हैरत कि बात यह है कि आबकारी अधिकारी ने डीएम को बायपास कर शराब की दो दुकानों का अपने हिसाब से आवंटन तो किया ही । साथ ही दुकानों का अधिभार भी 15 प्रतिशत तक कम लिया।
चमोली जनपद के कर्णप्रयाग और नारायणबगड़ में अंग्रेजी शराब की दो दुकानों का आवंटन डीएम के माध्यम से होना था। लेकिन आबकारी अधिकारी ने सीधे आबकारी आयुक्त सेमवाल से 29 मार्च को ही यह काम करवा लिया। जबकि डीएम ने 30 मार्च को फ़ाइल पेश करने को कहा था।
सच्चाई का पता चलते ही डीएम ने जब सवाल जवाब किये तो आबकारी अधिकारी व दो क्लर्क कार्यालय से गायब हो गए। और फोन भी स्विच ऑफ कर दिए। यह भी पता चला कि दोनों लिपिकों को आबकारी अधिकारी ने ही फोन बंद कर कार्यालय से गायब होने को कहा था।
चमोली के डीएम संदीप तिवारी ने बताया कि नियमों के अनुसार आवंटन की फाइल उनके माध्यम से आबकारी आयुक्त के पास जानी चाहिए थी, लेकिन जिला आबकारी अधिकारी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और आयुक्त से सीधे बात कर दुकानों का आवंटन करवा दिया।
डीएम ने बताया कि उन्होंने आबकारी अधिकारी के निलंबन की संस्तुति शासन से की है। गौरतलब है कि इस सनसनीखेज मामले में आबकारी अधिकारी सीधे सीएम धामी को पत्र लिख न्याय की मांग कर चुके हैं। पत्र में डीएम तिवारी के दुर्व्यवहार का जिक्र किया गया है।
इस मामले की सच्चाई सामने आते ही सोशल मीडिया में डीएम तिवारी के पक्ष में क्षेत्रीय जनता लामबंद होती नजर आ रही है। नियमों की अनदेखी कर शराब के इस’ खेल ‘ ने एक बार फिर नौकरशाही की दरार को चौड़ी कर दिया है और आबकारी आयुक्त की कार्य शैली पर सवाल उठने लगे हैं।
