
– आचार संहिता के दौरान नियमविरुद्ध नियुक्ति देने पर अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
– अधिकारी छुपाते रहे नियमविरुद्ध नियुक्ति, बेरोजगार संघ ने सत्य की जीत बताया
– विधानसभा में भी शोध अधिकारी को बना दिया था सचिव
पहाड़ का सच देहरादून।
शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल के मंत्री पद से हटने के बाद उनके कार्यकाल में शहरी निदेशालय में मोटे वेतन पर सलाहकार पद पर तैनात अभिषेक सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने इस मुद्दे को शिद्दत के साथ उठाया था।
अभिषेक सिंह ने शहरी निदेशालय में 1 फरवरी को कार्यभार ग्रहण किया था। और दबाव में 15 मार्च को इस्तीफा दिया। यह जानकारी मिलने पर बेरोजगार संघ ने निदेशालय पहुंचकर तीखा विरोध जताया था। मंगलवार को बेरोजगार संघ के उपाध्यक्ष राम कंडवाल एवं प्रदेश प्रवक्ता सुरेश सिंह को शहरी विकास निदेशालय ने सूचना के जनअधिकार के तहत अभिषेक सिंह के त्यागपत्र के बाबत जानकारी दी। त्यागपत्र 15 मार्च को दिया गया था।
दबाव में दिया गया त्यागपत्र
गौरतलब है कि उत्तराखंड बेरोज़गार संघ द्वारा शहरी विकास निदेशालय में विषय विशेषज्ञ के पद पर 1,75,000 ₹ के मासिक वेतन पर नियमविरुद्ध हुई नियुक्ति को लेकर हंगामा किया गया था। निदेशालय द्वारा मिली जानकारी के उपरांत अन्ततः दबाव में आकर अभिषेक सिंह से त्याग पत्र लिया गया। लखनऊ निवासी अभिषेक सिंह ने त्यागपत्र देते हुए 1 फरवरी से अब तक के वेतन भुगतान की मांग की है।
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के उपाध्यक्ष राम कंडवाल ने निदेशालय द्वारा लिए गए त्यागपत्र को सत्य की जीत बताते हुए कहा कि बीते 14 फरवरी को शहरी विकास निदेशालय में 1,75,000₹ की नौकरी पर तैनात अधिकारी का घेराव किया गया था।
इसके पश्चात सचिवालय में निदेशक नीतिका खंडेलवाल से भी मुलाकात की गई थी, जहां उन्होंने तैनाती से इनकार किया था। किंतु अभिषेक सिंह द्वारा दिए गए त्यागपत्र में तैनाती की तिथि 1 फरवरी दर्शाई गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि नीतिका खंडेलवाल ने गुमराह करने की कोशिश की थी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पूरी तैनाती ही नियमाविरुद्ध थी, इसी कारण अभिषेक सिंह से त्यागपत्र लिया गया।
राम कंडवाल ने कहा कि यदि अभिषेक सिंह को किसी भी प्रकार का भुगतान निदेशालय द्वारा किया गया तो पुनः निदेशालय की घेराबंदी की जाएगी।
अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की मांग
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के प्रवक्ता सुरेश सिंह ने पूर्व निदेशक नीतिका खंडेलवाल को झूठी अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके एवं अपर निदेशक डॉ. ललित नारायण मिश्र पर नियमविरुद्ध नियुक्ति एवं आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए। इससे भविष्य में कोई भी अधिकारी इस तरह के अवैध कार्य करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।
सुरेश सिंह ने कहा कि शहरी विकास निदेशालय की पूर्व निदेशक नीतिका खंडेलवाल ने अधिप्राप्ति नियमावली, सामान्य वित्त नियमावली के अतिरिक्त चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन किया है। इसकी शिकायत मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील कुमार एवं शहरी विकास सचिव नीतीश झा से की गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उक्त दोनों अधिकारियों पर वैधानिक कार्यवाही नहीं की गई तो जल्द ही चुनाव आयुक्त एवं सचिव का भी घेराव किया जाएगा।
