
पहाड़ का सच, विकासनगर/देहरादून।
अवैध खनन को लेकर संसद में दिए गए बयान को लेकर खनन कारोबारियों में काफी गुस्सा देखने को मिला। सोमवार को खनन से जुड़े लोगों ने हरबर्टपुर चौक पर हरिद्वार सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंका।
प्रदर्शनकारियों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि उनका बयान खनन कारोबारियों के हितों के खिलाफ है। खनन कारोबारियों का कहना है कि उनके काम को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है। खनन कारोबारियों ने कहा, “हम कड़ी मेहनत से अपना कारोबार चला रहे हैं, लेकिन इस तरह के बयान हमारे कारोबार पर संकट ला सकते हैं। हम इसकी निंदा करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि हमारे हितों की अनदेखी न की जाए।”
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में खनन कारोबारी मौजूद रहे, जिन्होंने सांसद के खिलाफ नाराजगी जताई और सरकार से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
बयान को तोड़ मरोड़कर का पेश किया गया – त्रिवेंद्र रावत
सोमवार को सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस विषय पर पत्रकारों से बात की। त्रिवेंद्र ने कहा कि पुतला जलाने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ संसद में कुछ नहीं बोला है, बकौल त्रिवेंद्र मैंने संसद में जो सवाल उठाए वो नियम के तहत उठाए और उत्तराखंड की व्यापक जन समस्या को लेकर उठाए,इकोसिस्टम को लेकर उठाये हैं। ये मामला किसी के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं है और किसी को इसे पर्सनली लेने की जरूरत नहीं है।
हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने व्यापक जनहित का मुद्दा संसद में उठाया है और इसका किसी से व्यक्तिगत तौर पर लेना देना नहीं है। त्रिवेंद्र ने सरकार को खनन के राजस्व बढ़ाने के लिए बधाई देने के साथ नसीहत भी दे डाली कि नियम कायदों का ध्यान रखा जाना भी बेहद जरूरी है।
संसद में दिए बयान के बाद उत्तराखंड में सियासी बवाल है। संसद में दिए वक्तव्य का खनन सचिव द्वारा सीधे खंडन करना और फिर त्रिवेंद्र का कुत्ते बनाम शेर वाला बयान इसे नया मोड़ दे गया। कुछ लोगों ने इस बयान को जातिवादी रंग देने की भी कोशिश की है। जिसके विरोध में कुछ जगह त्रिवेंद्र का पुतला भी दहन किया गया।
