
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
*~ वैदिक पंचांग ~
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*दिनांक – 30 मार्च 2025*
* दिन – रविवार*
*विक्रम संवत् – 2082*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – बसन्त*
*अमांत -17 गते चैत्र मास प्रविष्टि*
*राष्ट्रीय तिथि – 9 चैत्र मास*
*मास – चैत्र*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – प्रतिपदा दोपहर 12:49 तक तत्पश्चात् द्वितीया*
*नक्षत्र – रेवती शाम 04:35 तक तत्पश्चात् अश्विनी*
*योग – इन्द्र शाम 05:54 तक तत्पश्चात् वैधृति*
* राहुकाल- शाम 04:58 से शाम 06:30 तक*
*सूर्योदय – 06:09*
*सूर्यास्त – 06:34*
*दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
* ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:01 से प्रातः 05:47 तक*
*अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:20 से दोपहर 01:09 तक*
*निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:20 मार्च 31 से रात्रि 01:07 मार्च 31 तक*
*व्रत पर्व विवरण – चैत्री नूतन वर्ष वि.सं.२०८२ प्रारम्भ, गुड़ी पड़वा, चैत्री नवरात्र प्रारम्भ, श्री झूलेलालजी जयंती , हेडगवारजी जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (शाम 04:35 से प्रातः 06:33 मार्च 31 तक)*
* विशेष प्रतिपदा के दिन कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*चैत्री नूतन वर्ष : 30 मार्च 2025 – वि. सं 2082 प्रारम्भ*
* नवरात्रि का व्रत धन धान्य प्रदान करनेवाला, आयु और आरोग्य वर्धक हैं । शत्रुओं का दमन और बल की वृद्धि करनेवाला हैं । नवरात्री में सारस्वत्य मंत्र या इष्ट मंत्र का अनुष्ठान करने से और रात्रि 12:00 बजे तक का जागरण और जप,कीर्तन, ध्यान से अद्भुत लाभ होता हैं ।*
*इस दिन घर में नीम और अशोक वृक्ष के पत्तों का तोरण बाँधें, जिससे वहाँ से लोग गुजरें तो वर्षभर प्रसन्न रहें, निरोग रहें । स्वास्थ्य-रक्षा के लिए नीम की पत्तियाँ, मिश्री, काली मिर्च व अजवायन प्रसादरूप में लें ।।*
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*चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ – 30 मार्च
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*प्रतिपदा तिथि (नवरात्र के पहले दिन) पर माता को घी का भोग लगाएं । इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा शरीर निरोगी होता है ।*
* नवरात्रि का महत्व
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*देवी भागवत के तीसरे स्कन्द में नवरात्रि का महत्त्व वर्णन किया है । मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए देवी की महिमा सुनायी है, नवरात्रि के 9 दिन उपवास करने के शारीरिक लाभ बताये हैं ।*
* शरीर में आरोग्य के कण बढ़ते हैं ।*
* जो उपवास नहीं करता तो रोगों का शिकार हो जाता है, जो नवरात्रि के उपवास करता है, तो भगवान की आराधना होती है, पुण्य तो बढ़ता ही है, लेकिन शरीर का स्वास्थ्य भी वर्ष भर अच्छा रहता है ।*
* प्रसन्नता बढ़ती है । द्रव्य की वृद्धि होती है । लंघन और विश्रांति से रोगी के शरीर से रोग के कण खत्म होते हैं ।*
* नौ दिन नहीं तो कम से कम 7 दिन / 6 दिन /5 दिन , या आख़िरी के 3 दिन तो जरुर उपवास रख लेना चाहिए ।*
* नवरात्री में भगवती रुप में कन्या का पूजन हो और प्रेरणा देनेवाली ऐसी कन्या को भगवती समझ कर पूजन करने से दुःख मिटता है, दरिद्रता मिटती है ।*
* नवरात्रि के पहले दिन स्थापना, देव वृत्ति की कुंवारी कन्या का पूजन हो ।*
* नवरात्रि के दूसरे दिन 3 वर्ष की कन्या का पूजन हो, जिससे धन आएगा ,कामना की पूर्ति के लिए ।*
* नवरात्रि के तीसरे दिन 4 वर्ष की कन्या का पूजन करें, भोजन करायें तो कल्याण होगा, विद्यामिलेगी, विजय प्राप्त होगा, राज्य मिलता है ।*
* नवरात्रि के चौथे दिन 5 वर्ष की कन्या का पूजन करें और भोजन करायें । रोग नाश होते हैं ।*
*या देवी सर्व भूतेषु आरोग्य रुपेण संस्थिता ।*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमस्तस्यैनमो नमः ।।*
*जप करें; पूरा साल आरोग्य रहेगा ।*
* नवरात्रि के पांचवे दिन 6 वर्ष की कन्या काली का रुप मानकर पूजन करके भोजन करायें तो शत्रुओं का दमन होता है ।*
* नवरात्रि के छठे दिन 7 वर्ष की कन्या का चंडी का रुप मानकर पूजन करके भोजन करायें तो ऐश्वर्य और धन सम्पत्ति की प्राप्ति होती है ।*
* नवरात्रि के सातवे दिन 8 वर्ष की कन्या का शाम्भवी रुप में पूजन कर के भोजन करायें तो किसी महत्त्व पूर्ण कार्य करने के लिए, शत्रु पे धावा बोलने के लिए सफलता मिलेगी ।*
* नवरात्रि की अष्टमी को दुर्गा पूजा करनी चाहिए । सभी संकल्प सिद्ध होते हैं । शत्रुओं का संहार होता है ।*
* नवरात्रि के नवमी को 3 से 9 साल की कन्या का पूजन भोजन कराने से सर्व मंगल होगा, संकल्प सिद्ध होंगे, सामर्थ्यवान बनेंगे, इसलोक के साथ परलोक को भी प्राप्त कर लेंगे, पाप दूर होते हैं, बुद्धि में औदार्य आता है, नारकीय जीवन छुट जाता है, हर काम में, हर दिशा में सफलता मिलती है । नवरात्रि में पति पत्नी का व्यवहार नहीं, संयम से रहें ।*
*चैत्री नूतन वर्ष ( गुडी पड़वा ): 30 मार्च 2025 – वि. सं 2082 प्रारम्भ*
*चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा या गुडी पड़वा वर्ष का आरम्भ दिवस माना जाता है ।*
*इस दिन मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्रजी ने बालि के अत्याचार से लोगों को मुक्त किया था । उसकी खुशी में लोगों ने घर-घर गुड़ी (ध्वजा) खड़ी कर उत्सव मनाया इसलिए यह दिन ‘गुड़ी पड़वा’ नाम से प्रचलित हुआ ।*
*इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय पायी और विक्रम संवत्सर प्रारम्भ हुआ ।*
*आध्यात्मिक ढंग से देखें तो यह सतयुग का प्रारम्भिक दिवस है । ब्रह्माजी ने जब सृष्टि का आरम्भ किया उस समय इस तिथि को ‘प्रवरा’ (सर्वोत्तम) तिथि सूचित किया था ।*
*वर्ष के साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में से एक है गुडी पड़वा का दिन ! यह बिना मुहूर्त के मुहूर्त है अर्थात् इस पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहता है, पंचांग में शुभ मुहूर्त नहीं देखना पड़ता । इस दिन जितना भी भजन, ध्यान, जप, मौन, सेवा की जाए, उसका अनेक गुना फल मिलता है ।*
*नये साल के प्रथम दिन से ही चैत्री नवरात्र का उपवास चालू हो जाता है । 9 दिन का उपवास करके माँ शक्ति की उपासना की जाती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक प्रसन्नता व शारीरिक स्वास्थ्य-लाभ भी सहज में ही मिल जाता है ।*
*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वर्ष का पहला दिन होने से इसका विशेष महत्व है । वर्षारम्भ की यह मंगलदायिनी तिथि समूचे वर्ष के सुख-दुःख का प्रतीक मानी जाती है ।*
*भारतीय चैत्री नूतन वर्ष 9 अप्रैल को कैसे मनायें ?
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* सुबह सूर्योदय पहले स्नान करें । तिलक करें ।*
* सूर्योदय के समय शंखध्वनि करें । सूर्यनारायण को अर्घ दें । भगवा ध्वज फहरायें ।*
* अशोक – आम- नीम- पीपल के पत्ते का तोरण बांधे । नीम – काली मिर्च – मिश्रीयुक्त चटनी खायें ।*
*भजन-संकीर्तन करें । एक दूसरे को हार्दिक बधाई दें ।*
